खूब है *** महेंद्र जोशी
कुछ नहीं तेरी कमी है खूब है
फिर भी अपनी जिंदगी है खूब है
हम नहीं कचरे की कोई पेटी
खेत की मिटटी भरी है खूब है
इस तरह से इस लहू को मत छुओ
ऐक ज़िंदा बीजली है खूब है
वो समंदर अच्छे लगते उस तरफ
इस तरफ तो तश्नगी है खूब है
कोई रिश्ते जो महोबत से जुड़े
हमने माना बंदगी है खूब है
वक़्त उस का क्या अलग चलता यहाँ
जिस्म में इक ही घडी है खूब है
आँख से ओज़ल हुआ जाता जहाँँ
पाँव है ना तो जमीहै खूब है
दोस्त जोशी ना गली है ना तो घर
जाने कैसी सादगी है खूब है
तश्नगी...तृषा जिस्म ...शरीर
महेंद्र जोशी एप्रिल १४
कुछ नहीं तेरी कमी है खूब है
फिर भी अपनी जिंदगी है खूब है
हम नहीं कचरे की कोई पेटी
खेत की मिटटी भरी है खूब है
इस तरह से इस लहू को मत छुओ
ऐक ज़िंदा बीजली है खूब है
वो समंदर अच्छे लगते उस तरफ
इस तरफ तो तश्नगी है खूब है
कोई रिश्ते जो महोबत से जुड़े
हमने माना बंदगी है खूब है
वक़्त उस का क्या अलग चलता यहाँ
जिस्म में इक ही घडी है खूब है
आँख से ओज़ल हुआ जाता जहाँँ
पाँव है ना तो जमीहै खूब है
दोस्त जोशी ना गली है ना तो घर
जाने कैसी सादगी है खूब है
तश्नगी...तृषा जिस्म ...शरीर
महेंद्र जोशी एप्रिल १४
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